Govt. Degree College, Panarsa ( Mandi )
राजकीय महाविद्यालय, पनारसा : शिक्षा, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता की ओर अग्रसर
वर्ष 2015 में स्थापित राजकीय महाविद्यालय, पनारसा ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश किया है। स्थापना के उपरांत महाविद्यालय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पनारसा के परिसर में स्थित सीमित संसाधनों वाले सात कमरों में संचालित हो रहा था। तथापि, 10 नवम्बर 2025 को विभाग एवं सरकार द्वारा महाविद्यालय को उसके नव-निर्मित भवन में स्थानांतरित किया गया, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं समग्र विकास की नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं।
महाविद्यालय प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण परिवेश में स्थित है और वर्तमान में यहाँ कला एवं वाणिज्य संकाय की कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। सत्र 2025–26 में महाविद्यालय में लगभग 323 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। नवीन भवन में स्थानांतरण के पश्चात विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि की भी पर्याप्त संभावना है, क्योंकि अब संस्थान में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
वर्तमान सत्र में कला संकाय में छः अध्यापक तथा वाणिज्य संकाय में एक अध्यापक विद्यार्थियों को शिक्षण प्रदान कर रहे हैं। महाविद्यालय सीमित संसाधनों के भीतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
नवम्बर 2025 से मई 2026 तक के अल्प समय में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, सेवादारों तथा स्थानीय समुदाय के सहयोग से महाविद्यालय परिसर में अनेक रचनात्मक और उपयोगी पहलें प्रारंभ की गई हैं। उपलब्ध संसाधनों एवं निधियों का यथासंभव उपयोग करते हुए विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है।
नवीन महाविद्यालय परिसर में एक खेल मैदान तथा तीन मंजिला भवन उपलब्ध है। शीर्ष तल पर स्थित पुस्तकालय के अतिरिक्त महाविद्यालय में बहुउद्देशीय सभागार (Multipurpose Hall), सम्मेलन कक्ष (Conference Hall), कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centre), संग्रहालय (Museum), मुक्त पुस्तकालय (Open Library) तथा कला एवं शिल्प केंद्र (Art and Craft Space) की स्थापना की गई है। इन स्थानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए उनकी रचनात्मकता, संवाद क्षमता, अभिरुचियों और विविध प्रतिभाओं को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करना है।
महाविद्यालय का मुक्त पुस्तकालय निरंतर शैक्षणिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है, जहाँ विभिन्न पुस्तकों, साहित्य, समाज, संस्कृति एवं समकालीन विषयों पर नियमित चर्चा एवं विचार-विमर्श आयोजित किए जाते हैं। इससे विद्यार्थियों में पठन संस्कृति, विश्लेषणात्मक दृष्टि और अभिव्यक्ति क्षमता को प्रोत्साहन मिल रहा है।
महाविद्यालय में त्रिभाषी शब्द अभियान की शुरुआत भी की गई है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं के शब्द, उनके प्रयोग तथा वाक्य निर्माण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एवं प्रदर्शित किए जाते हैं। वर्षांत में इस प्रक्रिया से संबंधित प्रश्नोत्तरी एवं परीक्षण आयोजित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता और शब्द-संपदा को विकसित करने की दिशा में एक उपयोगी प्रयास है।
राजकीय महाविद्यालय, पनारसा में शिक्षा को समाज, संस्कृति और समुदाय से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से सत्र 2025–26 में गठित स्टूडेंट–टीचर कोऑर्डिनेशन कमेटी के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित किया गया है। इस समिति के अंतर्गत विद्यार्थियों ने स्वयं ई-न्यूज़लेटर का प्रकाशन प्रारंभ किया तथा ई-रिसर्च जर्नल "हरकारा" के प्रकाशन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
"हरकारा" का प्रवेशांक जून 2026 में राजकीय महाविद्यालय, पनारसा, निर्मला कॉलेज, महाविद्यालय महोत्सव पूजा तथा हिमतरू प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रकाशित किया गया। इसके लिए विद्यार्थियों ने अपने समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर पारंपरिक व्यंजनों, लोक कहावतों, गाँवों के इतिहास, वन-आधारित ज्ञान, स्थानीय संस्कृति तथा अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक पक्षों का संकलन किया है। यह प्रयास क्षेत्रीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है तथा शीघ्र ही इसे व्यापक शैक्षणिक समुदाय के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) के अंतर्गत विद्यार्थी हिमालयी क्षेत्रों की पारंपरिक जल-संरचना एवं सिंचाई प्रणालियों पर भी अध्ययन एवं शोध कर रहे हैं। विशेष रूप से पहाड़ी कूहलों (परंपरागत जल नहर प्रणाली), नदी आधारित सिंचाई तंत्र तथा बावड़ियों के निर्माण एवं उपयोग से संबंधित ज्ञान का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, ताकि स्थानीय परंपरागत ज्ञान को समझा और संरक्षित किया जा सके।
निर्मला कॉलेज, केरल के साथ आयोजित स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत महाविद्यालय के 18 विद्यार्थियों ने केरल में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। इस अनुभव के आधार पर विद्यार्थी आगामी अंक में हिमाचली पहाड़ी वास्तुकला एवं केरल की पारंपरिक वास्तुकला के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित लेख प्रकाशित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। हरकारा का दूसरा अंक जुलाई 2026 से जून 2027 के मध्य प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है।
महाविद्यालय की शैक्षणिक पहलों में "शब्दकोश हैकथॉन" एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत विद्यार्थी स्थानीय बोलियों के लुप्तप्राय शब्दों का संकलन कर रहे हैं, ताकि उन्हें एक पुस्तक के रूप में संरक्षित किया जा सके। इसी प्रकार "व्यास परिक्रमा – विरासत पदयात्रा" के माध्यम से चयनित गाँवों के ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय पक्षों का अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है, जिसे भविष्य में पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने की योजना है।
विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता एवं व्यावहारिक कौशल विकसित करने के उद्देश्य से महाविद्यालय में विभिन्न कौशल-आधारित गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इनमें सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, अपशिष्ट सामग्री से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चीड (Pine) की पत्तियों से उपयोगी उत्पाद एवं वस्त्र निर्माण जैसे प्रयास शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, उद्यमिता तथा स्वावलंबन की भावना को प्रोत्साहित करना है।
राजकीय महाविद्यालय, पनारसा का उद्देश्य केवल औपचारिक शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है जहाँ विद्यार्थी ज्ञान, कौशल, संस्कृति और सामुदायिक अनुभवों के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास कर सकें। महाविद्यालय निरंतर इस दिशा में प्रयासरत है कि विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक चेतना और उत्तरदायित्व की भावना से भी समृद्ध हों।