Administration

Principal's Desk

प्रिय विद्यार्थियों, सम्मानित अभिभावकों एवं महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों,

प्रणाम !

संस्थाएँ केवल ईंट-पत्थर से नहीं बनतीं। वे बनती हैं प्रतीक्षा से, विश्वास से और उस अथक श्रम से जो अक्सर दिखाई नहीं देता।

10 नवम्बर 2025 का दिन हमारे लिए केवल एक तारीख नहीं था। वह एक दशक लंबी प्रतीक्षा का अंत था। जब हमें सचिव शिक्षा विभाग के सहयोग से अपना नया भवन मिला, तो हमें केवल छत और दीवारें नहीं मिलीं — हमें एक उत्तर मिला।

परन्तु भवन मिल जाना मंजिल नहीं थी। वह तो एक नया प्रश्न था — अब इसे 'महाविद्यालय' कौन बनाएगा? उत्तर दिया आप सबने। हमारे शिक्षकों ने, कर्मचारियों ने, सेवादारों ने और सबसे बढ़कर आप विद्यार्थियों ने। दिन-रात एक कर के,आपने इस ढाँचे में प्राण फूँके।

दीवारें तो सरकार ने बनाईं। महाविद्यालकी टीम ने NEP 2020 के आलोक में उनमें अर्थ जोड़ा। हमने एक मंच बनाया क्योंकि विचारों को अभिव्यक्ति चाहिए। मुख्य द्वार बनाया क्योंकि सुरक्षा सम्मान भी है। खेलने के लिए स्थान मिला !आपने स्वयं नर्सरी में पौधे तैयार कर परिसर को हरियाली दी। पिछले ढाई वर्षों से बटोरी गई स्मृतियों को एक संग्रहालय मिला, और उसकी आत्मा को समझने के लिए हमने दस्तावेज़ीकरण की कार्यशालाएँ कीं। हेरिटेज फाउंडेशन, पुणे, महाराष्ट्र के साथ MoU के अंतर्गत दो ऑनलाइन पाठ्यक्रम हुए, और 14 से 20 मई के बीच अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई जहाँ निदेशक श्री भुजंग रामराव बोवडे एवं श्रीमती उषा बोवडे की उपस्थिति में आपने सात दिनों तक, सुबह दस से शाम चार बजे तक, पूरे समर्पण से कार्य कर सिद्ध किया कि प्रतिबद्धता हो तो विद्यार्थी सृजनकर्ता बन जाता है। संवाद के लिए सेमिनार हॉल व कॉन्फ्रेंस हॉल बने। ग्राउंड में Open Free Library स्थापित हुई, जहाँ 31 दिसम्बर 2025 की गोष्ठी और आप विद्यार्थियों द्वारा की गई पुस्तक गोष्ठियाँ आपके बौद्धिक योगदान का प्रमाण हैं। आगामी सत्र से Art & Craft Corner में आपके हाथ सृजन भी करेंगे। इसी अवधि में केरल के निर्मला कॉलेज, मुवत्तुपुझा में गया हमारा सांस्कृतिक-अकादमिक दल इस बात का साक्षी है कि हमारे MoU केवल कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर किए गए काम हैं।

और अब, आपसे विशेष बात, जो इस सत्र में प्रवेश लेंगे ! आप इस वर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी, इस महाविद्यालय के पहले ऐसे बैच हैं जो सीधे इस नए भवन में अपना शैक्षणिक जीवन आरम्भ करेंगे । आपके सामने एक परम्परा है — उन विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की, जिन्होंने अभाव में भी महाविद्यालय को जीवित रखा और इस नए परिसर में आते ही दिन-रात श्रम कर के इसे सार्थक बनाया। हम आपसे यही उम्मीद करते हैं कि आप इस मेहनत को और आगे बढ़ाएँगे। नए भवन में आने के बाद यहाँ जो अनेक गतिविधियाँ हुई हैं, उन्हें आप हमारी कॉलेज मैगज़ीन में देख सकते हैं। यह मैगज़ीन इसी वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध है। वहाँ आप देखेंगे कि विद्यार्थियों ने कितना परिश्रम किया है, और हमारे प्रतिबद्ध प्राध्यापकों /कर्मचारियों /सेवादारों की टीम ने किस समर्पण से उनके साथ काम किया है।

सुविधा मिल जाना सौभाग्य है, परन्तु उस सुविधा को सार्थक बना देना आपका कर्तव्य है। भवन सरकार ने बनाया है, 'महाविद्यालय' हम सबको मिलकर बनाना है। रोज़, अपने प्रश्नों से, अपने परिश्रम से, अपने चरित्र से।

आइए, इस नए परिसर में हम केवल पढ़ने न आएँ। हम 'गढ़ने' आएँ — स्वयं को, और साथ में इस राष्ट्र को।



शुभकामनाओं सहित,
डॉ. उरसेम लता
प्राचार्य
राजकीय महाविद्यालय पनारसा