Sanskrit

Outcomes

" संस्कृतं नाम् दैवी वाक् अन्वाख्याता महर्षिभिः "

कार्यक्रम के उद्देश्य

(Programme Objectives)

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्रों में जानकारी और विशेषतया पूर्ण ज्ञान प्रदान करना है जिससे वे संस्कृत साहित्य व शास्त्रीय ज्ञान के आस्वादन और विश्लेषण, मूल्यांकन में दक्षता हासिल कर सकें।
  • विद्यार्थी विषय के आस्वादन के साथ ही संस्कृत की ज्ञान परम्परा से जुड़कर भारतीय संस्कृति और उचित मूल्यों का भी अवगाहन कर सकेंगे।
  • इस कार्यक्रम में संस्कृत के प्राचीन साहित्य और ज्ञान-परम्परा के अतिरिक्त आधुनिक और समकालीन संस्कृत कवियों, रचनाकारों और साहित्य का अध्ययन भी निर्धारित किया गया है।
  • वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भाषा विज्ञान, अनुवाद और निबंध लेखन पर केन्द्रित पाठ्यक्रम भी इसमें सम्मिलित किया गया है।

कार्यक्रम के प्रतिफल

(Programme Outcomes - पीओ)

  • यह कार्यक्रम छात्रों को शास्त्रीय संस्कृत साहित्य की सामान्य समझ प्राप्त करने में मद्द करेगा।
  • छात्र संस्कृत भाषा के उन्नत ज्ञान से परिचित होंगे।
  • छात्रों में संस्कृत ग्रन्थों के माध्यम से दर्शन और धर्म, इतिहास और संस्कृति में समझ उत्पन्न करेगा।
  • यह कार्यक्रम छात्रों में संस्कृत ग्रन्थों को पढ़ने और समझने की क्षमता बढ़ाएगा।
  • छात्र संस्कृत ग्रन्थों को स्वतंत्र रूप से पढ़ सकेंगे।
  • छात्र शास्त्रीय संस्कृत में लिखे गए ग्रन्थों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • छात्र प्राचीन भारतीय साहित्य, धर्म, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में मौखिक व लिखित प्रस्तुतीकरण करने में सक्षम होंगे।
  • पाणिनी व्याकरण की बुनियादी समझ जानने में सक्षम होंगे।
  • प्राचीन चिकित्सा प्रणाली (आयुर्वेद), योग जैसे स्वास्थ्य विज्ञान परम्पराओं को समझ सकेंगे।
  • नाट्य-शास्त्र, रंगमंच और अभिनय आदि विषयों के शास्त्रीय स्वरूप को बताने में सक्षम होंगे।
  • व्यक्तित्व विकास के भारतीय दृष्टिकोण, वास्तुकला विज्ञान, परम्पराओं को समझ सकेंगे।
  • छन्द व गायन के शास्त्रीय स्वरूप को जान पाएंगे।
  • छात्र प्राचीन भारतीय दर्शन के किसी विशेष क्षेत्र जैसे उपनिषद्, गीता (वेदान्त) के क्षेत्र में विशेष चिन्तन करने में सक्षम होगा।

कार्यक्रम के विशिष्ट प्रतिफल

(Specific Programme Outcomes - एसपीओ)

1
प्रतियोगी परीक्षाएं

इस कार्यक्रम को पूर्ण करने के पश्चात विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परिक्षाओं के लिए आवेदन कर सकेगा।

2
स्वतंत्र अध्ययन

छात्र संस्कृत भाषा के ग्रन्थों का स्वतंत्र अध्ययन कर सकेगा।

3
राजभाषा अधिकारी

राजभाषा अधिकारी के रूप में विभिन्न विभागों में कार्य कर सकेगा।

4
सेना में सेवा

छात्र भारतीय सेना में धर्म-शिक्षक (Junior Commissioned Officer - JCO) के पद पर नियुक्त होकर अपनी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।