Syllabus
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को शास्त्रीय संस्कृत की समान्य रूपरेखा को शास्त्रीय ग्रन्थों (महाकाव्य) के माध्यम से परिचित कराना है।
प्रतिफल: यह पाठ्यक्रम छात्रों को संस्कृत कवियों के द्वारा प्रकट किए गए विचारों को जानने में मदद करेगा। छात्र काव्य में व्यक्तिगत कवियों की शैली, गुण, रीतियों को जानने में सक्षम होगा। यह कोर्स शास्त्रीय संस्कृत व व्याख्या के कौशल को छात्रों में उत्पन्न करेगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को संस्कृत गद्य से परिचित कराना तथा शास्त्रीय ग्रन्थों (गद्य महाकाव्य) के माध्यम से संस्कृत भाषा में अनुवाद व शब्द कौशल को विकसित करना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र प्रसिद्ध संस्कृत शास्त्रीय गद्य काव्य से परिचित होंगे तथा संस्कृत के प्रसिद्ध गद्य काव्यकारों व गद्यकाव्य के इतिहास, शैली, भारतीय समाज में इसके प्रभाव तथा तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों को जानने में सक्षम होंगे तथा छात्रों में संस्कृत संभाषण कौशल भी इससे विकसित होगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को संस्कृत साहित्य का सामान्य परिचय प्रदान करने के साथ पंचतंत्र और नीति साहित्य के ग्रन्थों के माध्यम से संस्कृत नीति साहित्य की रूपरेखा से परिचित कराना है।
प्रतिफल: छात्र संस्कृत भाषा के नीति साहित्य में दर्शाए गए जीवन के तरीकों और सार को जानेंगे। वे कथा के विभिन्न पक्षों और रूपों का अध्ययन भी सीखेंगे। पाठ्यक्रम छात्रों में नैतिक मूल्यों को स्थापित करेगा। वे संस्कृत साहित्य में नीति के सामान्य इतिहास से परिचित होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को उपनिषद, श्रीमदभगवद् गीता व पाणिनीय शिक्षा के सैद्धान्तिक पक्ष का ज्ञान देना है।
प्रतिफल: यह पाठ्यक्रम छात्रों को ईशावास्योपनिषद् के साथ-साथ स्वयं को परिचित करने में सक्षम करेगा और गीता के द्वितीय अध्ययन (सांख्य-योग) तथा उपनिषद् दर्शन से छात्र का सामान्य परिचय होगा। इस पाठ्यक्रम के पश्चात् छात्र गीता और उपनिषद् के दर्शन से अवगत होगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत के सबसे प्रसिद्ध नाटककारों (कालिदास, भास) की कृतियों, शैली तथा विभिन्न कालखण्डों में अलग-अलग समय पर प्रचलित प्रवृतियों से परिचित कराना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करने के पश्चात छात्र संस्कृत की समृद्ध नाट्य शैलियों तथा सौंदर्य के प्रति आकर्षित होंगे। इसके द्वारा छात्र नाट्य शास्त्र के अनुसार नाटकों की विभिन्न शैलियों से परिचित होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य पाणिनी व्याकरण के प्रवेश के लिए आधारभूत जानकारी उपलब्ध कराना है तथा संस्कृत के समृद्ध व्याकरण परम्पराओं से भी छात्रों को परिचित करवाना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र पाणिनी व्याकरण (अष्टाध्यायी) की संरचना को जानने में सक्षम होंगे तथा संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता से परिचित होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्राचीन चिकित्सा पद्वति, आयुर्वेद के इतिहास व उसके मूलभूत सिद्धान्त का ज्ञान प्रदान करना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र भारतीय पारम्परिक औषधियों, जीवनचर्या, आयुर्वेद के इतिहास, उद्भव व विकास को जानने में सक्षम होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत के छन्दों का आधारभूत ज्ञान तथा उनके गायन, यति आदि के नियमों से परिचित करवाना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्रों को छन्दों का आधारभूत ज्ञान प्राप्त होगा। वे छन्दों के भेद व उनकी अक्षर सँख्या की गणना व गायन में सक्षम होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को संस्कृत व्याकरण का आधार-भूत ज्ञान प्रदान करना है जिसके अन्तर्गत संज्ञा, संधि, समास और विभक्ति प्रकरण का ज्ञान छात्रों को ''लघुसिद्धान्तकौमुदी'' के नियमों के द्वारा प्रदान करना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र संस्कृत व्याकरण के मूलभूत सिद्धान्तों को समझने में सक्षम होंगे। छात्र लघु गद्य, वाक्य का अंग्रेजी या हिन्दी भाषा से संस्कृत भाषा में अनुवाद कर सकेंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य व्यक्तित्व विकास के सैद्धान्तिक व मनोवैज्ञानिक विकास की समझ उत्पन्न करना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र व्यक्ति, उसकी अवधारणा, व्यक्तित्व व इन्द्रिय सुधार व इन्द्रिय नियन्त्रण की सामान्य प्रक्रियाओं को जानने में सक्षम होगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारत के प्राचीन नाट्यग्रन्थ भरत मुनि प्रणीत ''नाट्यशास्त्र'' से परिचित कराना है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र रंगशाला, अभिनय, रस आदि के प्रकार व इसके शास्त्रीय स्वरूप को जानने में सक्षम होंगे।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को साहित्यशास्त्र के ग्रन्थों से परिचित कराना है तथा काव्य स्वरूप, भेद, शब्दशक्ति, रस का ज्ञान प्रदान करता है।
प्रतिफल: इस पाठ्यक्रम के पश्चात छात्र पंच महाभूतों का मनुष्य पर प्रभाव और उनके अनुसार, गृह, पर्यावरण, भवन संरचना को समझने में सक्षम होगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र से परिचित कराना है। यह पाठ्यक्रम वास्तुशास्त्र के प्राथमिक ज्ञान को समझने और वास्तुशास्त्र के अनुसार गृह, भूमि, स्थान, नगर इत्यादि की संरचना में प्राचीन भारतीय वास्तुविदों के ज्ञान कौशल की जानकारी प्रदान करना है।
प्रतिफल: यह पाठ्यक्रम छात्रों में भारतीय योग प्रणाली की प्रशंसा कराने में सक्षम होगा। विद्यार्थियों को महर्षि पतंजलि के योग सूत्र को समझने में सक्षम बनाएगा और संतुलित जीवन जीने में आवश्यक साधन उपलब्ध कराएगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों को एकाग्रचित, स्वस्थ शरीर व सफल जीवन के नेतृत्व का गुण प्रदान करेगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को योग की प्राचीनतम् पुस्तकों से परिचित कराना और हमारी प्राचीन योग परम्परा के दर्शन से अवगत कराना है। विद्यार्थियों को महर्षि पतंजलि रचित ''योग सूत्र'' ग्रन्थ से चयनित सूत्र के द्वारा योग दर्शन के मूलभूत सिद्धान्तों से परिचित कराना है।
प्रतिफल: यह पाठ्यक्रम छात्रों में भारतीय योग प्रणाली की प्रशंसा कराने में सक्षम होगा। विद्यार्थियों को महर्षि पतंजलि के योग सूत्र को समझने में सक्षम बनाएगा और संतुलित जीवन जीने में आवश्यक साधन उपलब्ध कराएगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों को एकाग्रचित, स्वस्थ शरीर व सफल जीवन के नेतृत्व का गुण प्रदान करेगा।
उद्देश्य: इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को संस्कृत भाषा पर आधारित भाषा विज्ञान के मूल सिद्धान्तों का परिचय देगा। इस पाठ्यक्रम को पूर्ण करने के पश्चात छात्र भाषा विज्ञान की अवधारणाओं को जानने में सक्षम होंगे।
प्रतिफल: यह पाठ्यक्रम छात्रों में भाषाओं और इसकी संरचना, नाद विधा अर्थात् (स्वनिम) ध्वनि विज्ञान, आकृति विज्ञान (स्वन) और वाक्य रचना आदि के अध्ययन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सक्षम करेगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को शब्दों का विश्लेषण करने और स्थापित भाषाई सिद्धान्तों के आधार पर अर्थ परिवर्तन के सिद्धान्तों को समक्षने में सक्षम बना देगा। भाषाई अध्ययन के संदर्भ में यह पाठ्यक्रम व्यावहारिक दृष्टिकोण छात्रों में उत्पन्न करेगा।